1.3.8Rigved
श्लोक:१.३.८ (1.3.8)सूक्त (३)

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श्लोक:१.३.८ (1.3.8)सूक्त (३)

विश्वे॑ दे॒वासो॑ अ॒प्तुरः॑ सु॒तमा ग॑न्त॒ तूर्ण॑यः । उ॒स्रा इ॑व॒ स्वस॑राणि ॥ (८)

हे वृष्टि करने वाले विश्वैदेवगण! जिस प्रकार सूर्य की किरणें बिना आलस्य के दिन में आती हैं, उसी प्रकार तुम तैयार सोमरस को पीने के लिए जल्दी आओ. (८)

O the rain-making Vishwadevas! Just as the sun's rays come into the day without laziness, so come quickly to drink the prepared somras. (8)