Sanskrit

विष्णु॑रि॒त्था प॑र॒मम॑स्य वि॒द्वाञ्जा॒तो बृ॒हन्न॒भि पा॑ति तृ॒तीय॑म् । आ॒सा यद॑स्य॒ पयो॒ अक्र॑त॒ स्वं सचे॑तसो अ॒भ्य॑र्च॒न्त्यत्र॑ ॥ (३)

Hindi

जानते हुए, उत्पन्न, महान्‌ एवं व्यापक अग्नि मुझ त्रित ऋषि की रक्षा करें. अपने मुख द्वारा अग्नि से जल की याचना करने वाले यजमान तन्मय होकर अग्नि की पूजा करते हैं. (३)

English

Knowing, the great and wide agni generated, protect me the sage Trinit. The hosts who ask for water from agni through their mouths worship the agni with tanmaya. (3)