Sanskrit

अव॑ स्पृधि पि॒तरं॒ योधि॑ वि॒द्वान्पु॒त्रो यस्ते॑ सहसः सून ऊ॒हे । क॒दा चि॑कित्वो अ॒भि च॑क्षसे॒ नोऽग्ने॑ क॒दाँ ऋ॑त॒चिद्या॑तयासे ॥ (९)

Hindi

हे बलपुत्र अग्नि! जो यजमान तुम्हें पिता जानता हुआ पुत्र के समान तुम्हारे हव्य को धारण करता है, उसे तुम पाप से अलग कर दो. हे जानकार अग्नि! तुम हमें कब देखोगे? हे यज्ञ की प्रेरणा देने वाले अग्नि! तुम हमें अच्छे रास्ते पर जाने की प्रेरणा कब दोगे? (९)

English

O son of strength, agni! The host who holds your heart like a son knowing you as the Father, separate him from sin. O knowledgeable agni! When will you see us? O agni that inspires yajna! When will you inspire us to go on the good path? (9)