Sanskrit
यस्मि॑न्नु॒क्थानि॒ रण्य॑न्ति॒ विश्वा॑नि च श्रव॒स्या॑ । अ॒पामवो॒ न स॑मु॒द्रे ॥ (२)
Hindi
इंद्र के प्रति उक्थ एवं सभी प्रशंसनीय हव्यान्न उसी प्रकार शोभा पाते हैं, जिस प्रकार जल की तरंगें सागर में सुशोभित होती हैं. (२)
English
The hakth and all the admirable averaging towards Indra are adorned in the same way that the waves of water adorn the ocean. (2)
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